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NH-319B हाईवे को मिली रफ्तार, वाराणसी-कोलकाता सफर होगा आधा, बिहार को बड़ा फायदा

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NH-319B हाईवे परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण तेज होगा। बिहार से गुजरने वाली इस सड़क से सफर का समय आधा होगा और व्यापार को नई गति मिलेगी।

पटना/आलम की खबर:बिहार के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाई देने वाली एक अहम परियोजना अब तेजी पकड़ने जा रही है। वाराणसी से कोलकाता को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-319बी (NH-319B) लंबे समय से चर्चा में था, लेकिन अब इस बहुप्रतीक्षित सड़क परियोजना को वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद इसके अधूरे हिस्सों पर भी काम जल्द गति पकड़ने वाला है। यह सड़क न सिर्फ बिहार बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के लिए भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर के रूप में उभरेगी।

यह परियोजना कई हिस्सों में विभाजित की गई थी, जिनमें अधिकांश पर पहले से निर्माण कार्य जारी था। हालांकि, रोहतास जिले के कुछ हिस्सों में तकनीकी और पर्यावरणीय अड़चनों के कारण काम अटका हुआ था। इन बाधाओं के कारण परियोजना की गति प्रभावित हो रही थी, लेकिन अब केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और नई योजना के तहत इन समस्याओं का समाधान निकाल लिया गया है।

अटके पैकेज को मिली नई दिशा

रोहतास जिले में आने वाले दो महत्वपूर्ण पैकेज लंबे समय से विवादों और तकनीकी दिक्कतों में उलझे हुए थे। वन क्षेत्र से गुजरने वाली सड़क के कारण टनल निर्माण का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिलने से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद वैकल्पिक तकनीकों पर विचार किया गया, लेकिन लागत अधिक होने के कारण उन्हें भी लागू नहीं किया जा सका।

आखिरकार इंजीनियरों और योजना विशेषज्ञों ने नया रूट तैयार किया, जिसमें सड़क को वन क्षेत्र से हटाकर शहरी इलाके के पास से ले जाने का निर्णय लिया गया। इस बदलाव के साथ ही परियोजना के इन हिस्सों को एक नए पैकेज के रूप में मंजूरी दे दी गई है, जिससे अब निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकेगा।

लंबाई बढ़ी, लेकिन सुविधा भी बढ़ेगी

नए रूट के कारण सड़क की कुल लंबाई में लगभग 15 किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है। अब यह हिस्सा करीब 42 किलोमीटर तक फैलेगा। इस पैकेज को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित किया जाएगा, जिसमें सरकार और निजी एजेंसी दोनों मिलकर लागत वहन करेंगी। इससे परियोजना के वित्तीय बोझ को संतुलित करने में मदद मिलेगी और निर्माण कार्य समय पर पूरा होने की संभावना बढ़ेगी।

सोन नदी पर बनेगा विशाल पुल

इस परियोजना का एक प्रमुख आकर्षण सोन नदी पर बनने वाला लंबा पुल होगा। करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे इस पुल के निर्माण से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। इसके अलावा कई छोटे पुल और संरचनाएं भी बनाई जाएंगी, जिससे सड़क पूरी तरह आधुनिक और सुरक्षित बन सके।

अन्य पैकेजों पर पहले से जारी है काम

परियोजना के अन्य हिस्सों में निर्माण कार्य पहले से जारी है। कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जिलों में सड़क के अलग-अलग हिस्सों पर तेजी से काम चल रहा है। इन पैकेजों के पूरा होने के बाद यह हाईवे एक लंबा और निरंतर मार्ग तैयार करेगा, जो राज्यों के बीच संपर्क को आसान बनाएगा।

सफर होगा आसान, समय की बड़ी बचत

इस हाईवे के बनने से यात्रा समय में भारी कमी आएगी। अभी वाराणसी से कोलकाता तक की दूरी तय करने में जहां 12 से 14 घंटे लग जाते हैं, वहीं इस नई सड़क के चालू होने के बाद यह समय घटकर करीब 6 से 7 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुविधाजनक बन जाएगी।

व्यापार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

यह सड़क परियोजना केवल यात्रा को आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर व्यापार और उद्योग पर भी पड़ेगा। हल्दिया बंदरगाह तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी। इससे बिहार सहित पूर्वी भारत के व्यापार को नई गति मिलेगी और औद्योगिक विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

रोजगार और स्थानीय विकास को भी फायदा

सड़क निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके अलावा, सड़क के किनारे छोटे-बड़े व्यवसायों के विकास की संभावना भी बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

विकास की नई तस्वीर

कुल मिलाकर, NH-319B परियोजना बिहार के लिए विकास की नई राह खोलने वाली साबित हो सकती है। यह न केवल राज्यों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगी। आने वाले समय में यह हाईवे बिहार की प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

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